Sunday, 8 July 2012

रेडियो प्लेबैक इंडिया: वर्षा ऋतु के रंग : मल्हार अंग के रागों का संग

रेडियो प्लेबैक इंडिया: वर्षा ऋतु के रंग : मल्हार अंग के रागों का संग

बहुत ही सही समय है मन को मेघों के रंग में रंगकर भीग जाने का...कहां से आए बदरा...आसमान को निहारिए , बादल उमड़ते-घुमड़ते आपकी ओर आते दिख जायेंगे...फिर मन करेगा ' बरसो रे  मेघा-मेघा...'

4 comments:

  1. समयोचित पोस्ट है।

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  2. जी, धन्‍यवाद...

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  3. होली मुबारक

    अभी 'प्रहलाद' नहीं हुआ है अर्थात प्रजा का आह्लाद नहीं हुआ है.आह्लाद -खुशी -प्रसन्नता जनता को नसीब नहीं है.करों के भार से ,अपहरण -बलात्कार से,चोरी-डकैती ,लूट-मार से,जनता त्राही-त्राही कर रही है.आज फिर आवश्यकता है -'वराह अवतार' की .वराह=वर+अह =वर यानि अच्छा और अह यानी दिन .इस प्रकार वराह अवतार का मतलब है अच्छा दिन -समय आना.जब जनता जागरूक हो जाती है तो अच्छा समय (दिन) आता है और तभी 'प्रहलाद' का जन्म होता है अर्थात प्रजा का आह्लाद होता है =प्रजा की खुशी होती है.ऐसा होने पर ही हिरण्याक्ष तथा हिरण्य कश्यप का अंत हो जाता है अर्थात शोषण और उत्पीडन समाप्त हो जाता है.

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